या बन की वर-बानिक या वन ही बनि आवै - नंद दास ग्रंथावली, रास पंचाध्यायी, श्री वृंदावन वर्णन (24)

या बन की वर-बानिक या वन ही बनि आवै - नंद दास ग्रंथावली, रास पंचाध्यायी, श्री वृंदावन वर्णन (24)

या बन की वर-बानिक, या वन ही बनि आवै ।
सेस महेस सुरेस गनेस, न पारहि पावै ॥

- श्री नंद दास, नंद दास ग्रंथावली, रास पंचाध्यायी, श्री वृंदावन वर्णन (24)

श्री वृन्दावन धाम की समानता केवल वृन्दावन धाम ही कर सकता है, जिसका पार शेष, महेश, इंद्र एवं गणेश भी नहीं पा सकते।