(राग लावनी छन्द)
रटत रटत राधा-मनमोहन अपनो जनम बितावेंगे।
लिखत लिखत लीला रस दम्पति नैनन नीर बहावेंगे ।। [1]
सुनत सुनत गुण छैल छबीली निशिदिन प्रेम बढ़ावेंगे ।
ललित लड़ैती अचल वास व्रज ऐसे दिन कब आवेंगे ।। [2]
- श्री ललित लड़ैती, श्री किशोरी कृपा कटाक्ष, विनय (21)
ऐसा कब होगा जब मैं श्री राधा मनमोहन नाम का रटन कर अपना जीवन बिताऊँगा एवं दिव्य दम्पति श्री युगल सरकार की लीला रस को लिख लिखकर नैनों से आँसु बहाऊँगा ? [1]
ऐसा कब होगा जब छैल छबीली [राधा कृष्ण] के गुण सुन सुनकर निशिदिन प्रेम बढ़ाया करूँगा । श्री ललित लड़ैती जी कहते हैं कि श्री वृंदावन में अटल वास करते हुए ऐसे दिन कब आएँगे? [2]
रटत रटत राधा-मनमोहन अपनो जनम बितावेंगे।
लिखत लिखत लीला रस दम्पति नैनन नीर बहावेंगे ।। [1]
सुनत सुनत गुण छैल छबीली निशिदिन प्रेम बढ़ावेंगे ।
ललित लड़ैती अचल वास व्रज ऐसे दिन कब आवेंगे ।। [2]
- श्री ललित लड़ैती, श्री किशोरी कृपा कटाक्ष, विनय (21)
ऐसा कब होगा जब मैं श्री राधा मनमोहन नाम का रटन कर अपना जीवन बिताऊँगा एवं दिव्य दम्पति श्री युगल सरकार की लीला रस को लिख लिखकर नैनों से आँसु बहाऊँगा ? [1]
ऐसा कब होगा जब छैल छबीली [राधा कृष्ण] के गुण सुन सुनकर निशिदिन प्रेम बढ़ाया करूँगा । श्री ललित लड़ैती जी कहते हैं कि श्री वृंदावन में अटल वास करते हुए ऐसे दिन कब आएँगे? [2]

