श्री वृंदावन बास वर, दियो न अनतहि जांउ - श्री रूप सखी, सिद्धांत के दोहा (73)

श्री वृंदावन बास वर, दियो न अनतहि जांउ - श्री रूप सखी, सिद्धांत के दोहा (73)

श्री वृंदावन बास वर, दियो न अनतहि जांउ ।
रसिक सिरोमनि की कृपा, नित्यबिहारहि गांउ ॥

- श्री रूप सखी, सिद्धांत के दोहा (73)

हे प्रभु! मुझे श्री वृंदावन का वास जो सर्वोपरि है उसे प्रदान कीजिए, जिसे पाकर मैं अन्यत्र कहीं न जाऊं। रसिक शिरोमणि ललिता अवतार स्वामी श्री हरिदास जी महाराज जी की कृपा से मैं श्यामा-कुंजबिहारी का निरंतर 'नित्य-विहार' का ही गुणगान करता रहूँ।