न च कर्माणि कुर्वीत नान्यदेवं यजेत्क्वचित् ।
नो पोष्यैकादशी वापि नहि सा राधिका परा ।।
- श्री वंशीअलि, श्री राधासिद्धांत (13)
श्री राधा की अनन्य भक्ति में न तो कोई कर्मकांड, न अन्य किसी देवी देवता की उपासना, न ही एकादशी व्रत इत्यादि किसी प्रकार की विधियों को मानने की आवश्यकता है ।
नो पोष्यैकादशी वापि नहि सा राधिका परा ।।
- श्री वंशीअलि, श्री राधासिद्धांत (13)
श्री राधा की अनन्य भक्ति में न तो कोई कर्मकांड, न अन्य किसी देवी देवता की उपासना, न ही एकादशी व्रत इत्यादि किसी प्रकार की विधियों को मानने की आवश्यकता है ।

