रस रस रस रस प्रेम-रस बरसत व्रज दिन रैन - ब्रज के दोहे

रस रस रस रस प्रेम-रस बरसत व्रज दिन रैन - ब्रज के दोहे

रस रस रस रस प्रेम-रस, बरसत व्रज दिन रैन।
पल पल पियत आघात नहिं, प्रेम पियासे नैन॥

- ब्रज के दोहे

श्री ब्रजधाम में दिन-रात प्रेम-रस की वर्षा हो रही है। इस प्रेम-रस के प्यासे नेत्र पल-पल इसे पान करते हैं, फिर भी उनकी तृप्ति नहीं होती और उनकी प्यास बनी रहती है।