प्रान धन राधा माधव लाल ।
रस सागर आगर शोभा सुख रूप उजागर जाल ।। [1]
प्रेम परस्पर चारु चौगुने सहचरि संग रसाल ।
नित्य नाम लीला मय जोरी रूप धाम सु विशाल ।। [2]
श्री प्रिया सखी हिय कुंज विहारिन आनंद सिंधु दयाल ।। [3]
- श्री प्रिया दास
श्री राधा माधव लाल ही हमारे प्रान धन हैं जो साक्षात रस के सागर हैं, जो समस्त शोभा के धाम, सुख स्वरूप, एवं रूप उजागर हैं । [1]
दिव्य युगल नित्य ही परस्पर प्रेम में उन्मत्त रहते हैं एवं चारों और सहचरियों से घिर कर रस को बरसाते रहते हैं । जिन युगल जोड़ी के असीम नाम, लीला, रूप, धाम इत्यादि नित्य हैं । [2]
श्री प्रिया सखी कहती हैं की उनके हृदय में आनंद स्वरूप श्री कुंज बिहारिनी नित्य ही निवास करती हैं जो दया का सिंधु हैं । [3]
रस सागर आगर शोभा सुख रूप उजागर जाल ।। [1]
प्रेम परस्पर चारु चौगुने सहचरि संग रसाल ।
नित्य नाम लीला मय जोरी रूप धाम सु विशाल ।। [2]
श्री प्रिया सखी हिय कुंज विहारिन आनंद सिंधु दयाल ।। [3]
- श्री प्रिया दास
श्री राधा माधव लाल ही हमारे प्रान धन हैं जो साक्षात रस के सागर हैं, जो समस्त शोभा के धाम, सुख स्वरूप, एवं रूप उजागर हैं । [1]
दिव्य युगल नित्य ही परस्पर प्रेम में उन्मत्त रहते हैं एवं चारों और सहचरियों से घिर कर रस को बरसाते रहते हैं । जिन युगल जोड़ी के असीम नाम, लीला, रूप, धाम इत्यादि नित्य हैं । [2]
श्री प्रिया सखी कहती हैं की उनके हृदय में आनंद स्वरूप श्री कुंज बिहारिनी नित्य ही निवास करती हैं जो दया का सिंधु हैं । [3]

