कोई जन सेवै शाह राजा राव ठाकुर को,
कोई जन सेवै भैरो भूप काज सार हैं। [1]
कोई जन सेवै देवी चंडिका प्रचण्डी ही को,
कोई जन सेवै 'ताज' गणपति सिर भार हैं॥ [2]
कोई जन सेवै प्रेत भूत भौसागर को,
कोई जन सेव जग कहूँ बार बार हैं। [3]
काहू के ईश विधि शंकर को नेम बड़ो,
मेरे तो अधार एक नन्द के कुमार हैं॥ [4]
- ताज बीबी
कुछ लोग राजाओं, ठाकुरों आदि की सेवा करते हैं, कुछ लोग अपनी इच्छाओं को पूरा करने के लिए भैरव की भक्ति करते हैं। [1]
कोई जन सेवै भैरो भूप काज सार हैं। [1]
कोई जन सेवै देवी चंडिका प्रचण्डी ही को,
कोई जन सेवै 'ताज' गणपति सिर भार हैं॥ [2]
कोई जन सेवै प्रेत भूत भौसागर को,
कोई जन सेव जग कहूँ बार बार हैं। [3]
काहू के ईश विधि शंकर को नेम बड़ो,
मेरे तो अधार एक नन्द के कुमार हैं॥ [4]
- ताज बीबी
कुछ लोग राजाओं, ठाकुरों आदि की सेवा करते हैं, कुछ लोग अपनी इच्छाओं को पूरा करने के लिए भैरव की भक्ति करते हैं। [1]
कुछ लोग प्रचंडी देवी चंडी की भक्ति करते हैं और कुछ लोग गणेशजी की पूजा करते हैं, जो देवताओं में सबसे प्रमुख हैं। [2]
कुछ लोग अपनी सांसारिक इच्छाओं की पूर्ति के लिए भूत-प्रेतों की आराधना करते हैं और कुछ लोग अपनी इच्छानुसार यहां-वहां, जिसकी जितनी समझ है, उस अनुसार पूजा करते हैं। [3]
कुछ लोग विभिन्न प्रकार के व्रतों का पालन करके भगवान शिव को अपने आराध्य देव के रूप में पूजते हैं, परंतु ताज कहती हैं कि मेरे तो हृदय के आधार और इष्ट देव कोई अन्य नहीं अपितु नंद के लाल, भगवान श्री कृष्ण ही हैं। [4]

