जय वृन्दावन धाम सब, जनमन पूरन काम ।
सुघर सहेलिन संग रँग, बिहरें स्यामा स्याम ॥
- श्री हरिव्यास देवाचार्य, महावाणी, उत्साह सुख (38)
उस पावन श्री वृन्दावन धाम की सदा जय हो, जो सब जनों की अभिलाषाओं को पूर्ण करने वाला है। वहीं श्री श्यामा-श्याम सुंदर अपनी सुघर सहेलियों के साथ मधुर विहार करते हैं।
सुघर सहेलिन संग रँग, बिहरें स्यामा स्याम ॥
- श्री हरिव्यास देवाचार्य, महावाणी, उत्साह सुख (38)
उस पावन श्री वृन्दावन धाम की सदा जय हो, जो सब जनों की अभिलाषाओं को पूर्ण करने वाला है। वहीं श्री श्यामा-श्याम सुंदर अपनी सुघर सहेलियों के साथ मधुर विहार करते हैं।

