(राग तोड़ी-तीन ताल)
बंदौं राधा-पद-रज पावन ।
स्याम-सुसेवित, परम पुन्यमय, त्रिबिध ताप बिनसावन ।। [1]
अनुपम परम, अपरिमित महिमा, सुर-मुनि-मन तरसावन ।
सर्बाकर्षक रसिक कृष्णघन दुर्लभ सहज मिलावन ।। [2]
- श्री हनुमान प्रसाद पोद्दार (भाईजी), पद रत्नाकर, वंदना एवं प्रार्थना (10)
श्री राधा की पावन पद रज का मैं वंदन करता हूँ जो नित्य ही श्री श्यामसुंदर द्वारा सेवित है, परम पुण्यमय है एवं तीन प्रकार के तापों का विनाश करने वाली है । [1]
श्री राधा की चरण रज परम अनुपम है, जिसकी महिमा अपरम्पार है एवं सुर मुनि इत्यादि द्वारा वांछित है । श्री हनुमान प्रसाद पोद्दार (भाईजी) कहते हैं कि श्री राधा चरण रज की ऐसी अद्बुत महिमा है कि जिन सर्वाकर्षक रसिक श्री कृष्ण चंद्र का संग अति दुर्लभ माना गया है, उनको भी सहज मिला देती है । [2]
बंदौं राधा-पद-रज पावन ।
स्याम-सुसेवित, परम पुन्यमय, त्रिबिध ताप बिनसावन ।। [1]
अनुपम परम, अपरिमित महिमा, सुर-मुनि-मन तरसावन ।
सर्बाकर्षक रसिक कृष्णघन दुर्लभ सहज मिलावन ।। [2]
- श्री हनुमान प्रसाद पोद्दार (भाईजी), पद रत्नाकर, वंदना एवं प्रार्थना (10)
श्री राधा की पावन पद रज का मैं वंदन करता हूँ जो नित्य ही श्री श्यामसुंदर द्वारा सेवित है, परम पुण्यमय है एवं तीन प्रकार के तापों का विनाश करने वाली है । [1]
श्री राधा की चरण रज परम अनुपम है, जिसकी महिमा अपरम्पार है एवं सुर मुनि इत्यादि द्वारा वांछित है । श्री हनुमान प्रसाद पोद्दार (भाईजी) कहते हैं कि श्री राधा चरण रज की ऐसी अद्बुत महिमा है कि जिन सर्वाकर्षक रसिक श्री कृष्ण चंद्र का संग अति दुर्लभ माना गया है, उनको भी सहज मिला देती है । [2]

