राधिका-चरणरेणु, भूषण करिया तनु, अनायासे पावे गिरिधारी।
राधिका चरणाश्रय, जे करे से महाशय, तारे मुइ बलिहारी ।।
- श्री नरोत्तम दास, प्रेम भक्ति चंद्रिका (107)
हे भाई! श्रीराधिका की चरणरेणु को तू अपने शरीर का भूषण कर, तब तो बिना किसी श्रम के तुम्हें श्रीकृष्ण गिरिधारी मिल जायेंगे। जो व्यक्ति श्रीराधा-चरण का आश्रय ग्रहण करता है, वास्तव में वही महत्-पुरुष है, में उस पर बलिहारी जाता हूँ।
राधिका चरणाश्रय, जे करे से महाशय, तारे मुइ बलिहारी ।।
- श्री नरोत्तम दास, प्रेम भक्ति चंद्रिका (107)
हे भाई! श्रीराधिका की चरणरेणु को तू अपने शरीर का भूषण कर, तब तो बिना किसी श्रम के तुम्हें श्रीकृष्ण गिरिधारी मिल जायेंगे। जो व्यक्ति श्रीराधा-चरण का आश्रय ग्रहण करता है, वास्तव में वही महत्-पुरुष है, में उस पर बलिहारी जाता हूँ।

