बिहारिनि लाडिली सुख रासि - श्री नागरी देव जी, श्री नागरी देव जू की वाणी, श्रिंगार रस के पद (34)

बिहारिनि लाडिली सुख रासि - श्री नागरी देव जी, श्री नागरी देव जू की वाणी, श्रिंगार रस के पद (34)

(राग विलावल)
बिहारिनि लाडिली सुख रासि ।
रूप अनूप महा मन मोहनी सहज छबीली हासि ॥ [1]
अंग अंग अनंग रंग स्याम संग विलसत मननि हुलासि ।
इहि रस मत्त मगन अनुदिन बलि जाइ नागरीदासि ॥ [2]

- श्री नागरी देव जी, श्री नागरी देव जू की वाणी, श्रिंगार रस के पद (34)

हमारी लाड़िली नित्य विहारिनी [श्री राधा] सुख की राशि हैं । जिनका स्वरूप अति अद्बुत एवं अनूप है, मन को मोहने वाली एवं जिनकी छबीली मृदु हास [मुस्कान] है । [1]

श्री राधा के अंग अंग प्रेम रूपी अनंग से रंगे हुए हैं, जो नित्य ही श्याम सुंदर संग विहार पारायण है एवं नित्य ही उल्लसित रहती हैं । श्री नागरीदेव जी कहते हैं कि वे भी अनुदिन श्री राधा को निहार निहार कर, नित्य विहार के इस अद्बुत रस में उन्मत्त रहते हैं और पुनः पुनः बलिहारी जाते हैं ।  [2]