यह छवि तिहूँ भुवन कहुँ नाहीं, जो ब्रज भूतल धाम - श्री सूरदास

यह छवि तिहूँ भुवन कहुँ नाहीं, जो ब्रज भूतल धाम - श्री सूरदास

यह छवि तिहूँ भुवन कहुँ नाहीं, जो ब्रज भूतल धाम ।
सुंदर त्रैगुन रस की सीमा, “सूर” राधिका श्याम॥

- श्री सूरदास

यह छवि, जो इस भूतल पर स्थित ब्रज धाम में देखने को मिलती है, वह तीनों लोकों में कहीं नहीं है। श्री सूरदास जी कहते हैं कि श्री राधिका-श्याम सुंदर की यह दिव्य जोड़ी तीनों गुणों से परे दिव्य रस की अंतिम सीमा हैं।