वृंदावन वास श्यामा श्याम को निवास  - श्री हित चंद्र लाल गोस्वामी, वृंदावन प्रकाश माला (2)

वृंदावन वास श्यामा श्याम को निवास - श्री हित चंद्र लाल गोस्वामी, वृंदावन प्रकाश माला (2)

वृंदावन वास श्यामा श्याम को निवास,
जहाँ चित के हुलास जुत आस ही लगाइ हौं। [1]
रसिक उपासिक अनन्यनि कौ संग गहि,
बानी रस - सानी नित प्रीति ही सौं गाइ हौं॥ [2]
कोऊ कहौ बुरौ, फेरि कोऊ कहौ भलौ मोहि,
दोऊ सौं न काज हिय दम्पति बसाइ हौं। [3]
यह तन पाइ राधावर गुन गाहि,
'चन्द्र' हित कौ कहाइ और कोन कौ कहाइ हौं॥ [4]

- श्री हित चंद्र लाल गोस्वामी, वृंदावन प्रकाश माला (2)

जहां श्यामा-श्याम का नित्य निवास है, ऐसे श्री वृंदावन धाम में ही नित्य वास करते हुए, हृदय में नित्य हुलास रखते हुए श्री श्यामा-श्याम का भजन कर, उनको नित्य प्रसन्न करने की आशा को हृदय में धारण करूँगा। [1]

रसिक अनन्य उपासकों का संग कर, उनके द्वारा रचित सरस वाणी नित्यप्रति मैं उन्मत्त होकर गायन करता रहूँ। [2]

चाहे कोई बुरा कहे या भला कहे, मुझे दोनों से ही कोई सरोकार नहीं है, मैं तो बस हृदय में दिव्य दम्पति श्री राधा कृष्ण को ही नित्य बसाए रहूँ। [3]

श्री हित चंद्र लाल जी कहते हैं कि मुझे यह देव दुर्लभ मानव देह प्राप्त हुआ है, मैं केवल राधावर का गुणगान करूँगा, एवं हित रूपी चंद्रमा कहलाकर मैं नित्य भजन करूँगा। [4]