वृंदावन बसि, वृंदावन बसि, वृंदावन सुखदाई रे - श्री किशोरी अलि, मन शिक्षा (9)

वृंदावन बसि, वृंदावन बसि, वृंदावन सुखदाई रे - श्री किशोरी अलि, मन शिक्षा (9)

वृंदावन बसि, वृंदावन बसि, वृंदावन सुखदाई रे ।
जहां अखंड विराजत दम्पति, करत केलि मन भाई रे ॥

- श्री किशोरी अलि, मन शिक्षा (9)

वृन्दावन में बसना ही परम सुखदायी है क्योंकि यह वृन्दावन ही सब प्रकार से सुख देने वाला है जहाँ हमारे लाड़ले दम्पति (श्री राधा-कृष्ण) सदैव अखंड रूप से विराजमान रहते हैं और मन को भाने वाली दिव्य केलि-क्रीड़ाएं करते रहते हैं।