एक रज- रेणुका पै रजत - डंडी स्वामी श्री हरे कृष्णानन्द सरस्वती ‘हरे कृष्ण’, वृंदावन शतक (15)

एक रज- रेणुका पै रजत - डंडी स्वामी श्री हरे कृष्णानन्द सरस्वती ‘हरे कृष्ण’, वृंदावन शतक (15)

एक रज- रेणुका पै रजत पहार वारों,
क्षीर-सुधा-सिन्धु वारौं यमुना ललाम पे। [1]
वारों कोटि कामधेनु एक एक कपिला पै,
वारौं कल्प तरु को कदम्ब अभिराम पै॥ [2]
वारों शची रमा उमा राधा-पद-पंकज पै,
वारौं शत कोटि काम प्यारे घनश्याम पै। [3]
वारौं सब देव-लोक एक एक मन्दिर पै,
वारी डारौं ब्रह्म-लोक वृन्दाबन धाम पै॥ [4]

- डंडी स्वामी श्री हरे कृष्णानन्द सरस्वती ‘हरे कृष्ण’, वृंदावन शतक (15)

वृंदावन की एक रज रेणुका पर चाँदी का पहाड़ न्योछावर है। श्री यमुना जी की दिव्यता पर क्षीर सिंधु [जहां लक्ष्मी नारायण का निवास है] न्योछावर है। [1]

अनंत कोटि कामधेनु वृंदावन की एक-एक कपिला [गाय] पर न्योछावर है। कल्प वृक्ष वृंदावन के कदम्ब वृक्षों पर न्योछावर है। [2]

शचि, पार्वती, लक्ष्मी जी आदि श्री राधा पद पंकज पर न्योछावर है। अनंत कोटि कामदेव प्यारे श्यामसुंदर पर न्योछावर है। [3]

वृंदावन के एक-एक मंदिर पर समस्त देव लोक न्योछावर है। श्री हरे कृष्णानन्द सरस्वती 'हरे कृष्ण' जी कहते हैं कि साक्षात ब्रह्म लोक ही वृंदावन धाम पर न्योछावर है। [4]