श्री निधिबन रस की खांनी हैं - श्री ललित किशोरी देव, श्री ललित किशोरी देव जू की वाणी, सिद्धान्त की साखी (47)

श्री निधिबन रस की खांनी हैं - श्री ललित किशोरी देव, श्री ललित किशोरी देव जू की वाणी, सिद्धान्त की साखी (47)

 श्री निधिबन रस की खांनी हैं, सोभा परम अपार। 
काम केलि वरषत रहैं, निरवधि नित्य बिहार॥
- श्री ललित किशोरी देव, श्री ललित किशोरी देव जू की वाणी, सिद्धान्त की साखी (47)

श्री निधिवन रस की एक ऐसी अद्भुत खान है, जिसकी महिमा और शोभा परम अपार है। वहाँ नित्य-विहार जनित काम-क्रीड़ाओं (प्रेम-लीलाओं) की वर्षा निरंतर होती रहती है।