श्रीराधिका नाम श्रवन सुन्यौ है जबतैं - श्री किशोरीदास (गौड़ीय संत)

श्रीराधिका नाम श्रवन सुन्यौ है जबतैं - श्री किशोरीदास (गौड़ीय संत)

(राग असावरी)
श्रीराधिका नाम श्रवन सुन्यौ है जबतैं आनंद हिये न समाय। [1]
पुलकित अंग और होत रोमांचित सब अंग प्रेम चुचाय॥ [2]
मिटि जाय जडताई मन की सगरो अद्भुत रसिकाई झलकत आय। [3]
किशोरीदास नाम सुनत होत ऐसी गति देखिवेकी छबि कैसें कही जाय॥ [4]

- श्री किशोरीदास (गौड़ीय संत)

जब से श्री राधा नाम का श्रवण किया है तब से आनंद हृदय में किसी भी प्रकार समाता नहीं और बाहर उछल आता है। [1]

अंग अंग पुलकित और रोमांचित हो रहा है, समस्त अंगों से मानो प्रेम रस टपक रहा है। [2]

श्री राधा नाम के प्रभाव से मन की समस्त जड़ता मिट रही है, एवं अद्भुत रसिकता का प्रादुर्भाव हो रहा है। [3]

श्री किशोरीदास जी कहते हैं कि “राधा नाम सुनते ही श्री राधा की छवि दर्शन की ऐसी लालसा ह्रदय में प्रकट होती है की कहते नहीं बनता।” [4]