स्याम सलौनी राधिका, गोरी राधा बाल।
सहचरिगन सब राधिका, हौं फिरिहौं तिहिं नाल॥ [1]
राधा मेरी बनथली, राधा ही है लाल।
ललिता राधा रूप हैं, हौंहूँ राधा बाल॥ [2]
- श्री वंशी अलि, ह्रदय सर्वस्व (29)
श्री राधा को सर्वत्र देखने वाली सखी कहती है,
साँवरे श्री श्यामसुंदर भी श्री राधा हैं, गोरी श्री श्यामा जू तो श्री राधा ही हैं, समस्त सहचरिगण भी श्री राधा स्वरुप हैं, जिनके संग मैं भी विचरण करती हूँ। [1]
श्री वंशी अली कहते हैं "श्री ब्रज धाम भी श्री राधा स्वरुप हैं, श्री लाल जी भी श्री राधा हैं, श्री ललिता जू भी श्री राधा स्वरुप हैं एवं मैं भी श्री राधा स्वरुप सखी हूँ।" [2]

