श्री हरिदास करैं सो होइ। श्रीबिहारी बिहारिनि कौ मुख जोइ॥
श्री वृन्दावन रहिये सोइ। नित उठि पीजै जमुना तोइ॥
- श्री ललितमोहिनी देव, श्री ललितमोहिनी देव जू की वाणी (1)
श्री स्वामी हरिदास जी की कृपा से ही भक्त को नित्य-विहार-रस की प्राप्ति होती है। अतः साधक को चाहिए कि वह समस्त चिंताओं का त्याग करके सदा श्री बिहारी-बिहारिनि जू के मुख-कमल का दर्शन करे, श्री वृन्दावन में निवास करे और नित्य श्रद्धापूर्वक श्री यमुना-जल का पान करे।
श्री वृन्दावन रहिये सोइ। नित उठि पीजै जमुना तोइ॥
- श्री ललितमोहिनी देव, श्री ललितमोहिनी देव जू की वाणी (1)
श्री स्वामी हरिदास जी की कृपा से ही भक्त को नित्य-विहार-रस की प्राप्ति होती है। अतः साधक को चाहिए कि वह समस्त चिंताओं का त्याग करके सदा श्री बिहारी-बिहारिनि जू के मुख-कमल का दर्शन करे, श्री वृन्दावन में निवास करे और नित्य श्रद्धापूर्वक श्री यमुना-जल का पान करे।

