अस्तु वामास्तु वा राधे कोटि जन्मान्तरेऽपि मे।
त्वत्पदाम्बुरुहे दास्यं आशात्वावश्यकी मम॥
- श्री हित कृष्ण चंद्र, श्री राधा उपसुधा निधि (60)
हे राधे ! आपके चरण-सरोरुह-दास्य की आवश्यकीय आशा ही मेरी एक मात्र आशा है, वह चाहे कोटि-कोटि जन्मों में पूरी हो या न भी हो।
त्वत्पदाम्बुरुहे दास्यं आशात्वावश्यकी मम॥
- श्री हित कृष्ण चंद्र, श्री राधा उपसुधा निधि (60)
हे राधे ! आपके चरण-सरोरुह-दास्य की आवश्यकीय आशा ही मेरी एक मात्र आशा है, वह चाहे कोटि-कोटि जन्मों में पूरी हो या न भी हो।

