लुटेरिन लाड़िली लाल को लयो सर्वस रस लूटि - महावाणी, सुरत सुख (83)

लुटेरिन लाड़िली लाल को लयो सर्वस रस लूटि - महावाणी, सुरत सुख (83)

 लुटेरिन लाड़िली लाल को, लयो सर्वस रस लूटि ।
बाँधि कियो अपने बस कस करि, क्यों हू न पावत छूटि ॥

- श्री हरिव्यस देवाचार्य, महावाणी, सुरत सुख (83)

श्री राधा ऐसी परम लुटेरिन हैं कि उन्होंने श्री कृष्ण का समस्त सर्वस्व प्रेमपूर्वक अपने अधिकार में कर लिया है। इतना ही नहीं, उन्होंने उन्हें अपने प्रेम के बंधन में इस प्रकार बाँध रखा है कि वे सदा उनके वश में रहते हैं।