हमारी सरबस राधा प्यारी ।
सब ब्रज-स्वामिनी हरि-अभिरामिनी श्रीवृषभानु-दुलारी । [1]
बृंदाबन-देवी सुख-सेवी सहज दीन-हितकारी ।
'हरीचंद' गुन-निधि सोभा-निधि कीरति की सुकुमारी ॥ [2]
- श्री भारतेंदु हरिशचंद्र, भारतेंदु ग्रंथावली, प्रेम फुलवारी (87)
हमारी परम प्रिय श्री राधा, जो सम्पूर्ण ब्रज की देवी हैं, जो वृषभानु दुलारी हैं, जो भगवान हरि के लिए सुख का साक्षात स्वरूप हैं, वे ही हमारा सर्वस्व हैं । [1]
श्री राधा वृंदावन की सर्वोपरि ईश्वरी हैं, जो रस का ही सेवन करती हैं, एवं वे दीनों की सहज ही हितकारी हैं । श्री भारतेंदु हरिशचंद्र कहते हैं "कीरति सुकुमारी श्री राधा गुण की निधि एवं शोभा की निधि हैं ।" [2]
सब ब्रज-स्वामिनी हरि-अभिरामिनी श्रीवृषभानु-दुलारी । [1]
बृंदाबन-देवी सुख-सेवी सहज दीन-हितकारी ।
'हरीचंद' गुन-निधि सोभा-निधि कीरति की सुकुमारी ॥ [2]
- श्री भारतेंदु हरिशचंद्र, भारतेंदु ग्रंथावली, प्रेम फुलवारी (87)
हमारी परम प्रिय श्री राधा, जो सम्पूर्ण ब्रज की देवी हैं, जो वृषभानु दुलारी हैं, जो भगवान हरि के लिए सुख का साक्षात स्वरूप हैं, वे ही हमारा सर्वस्व हैं । [1]
श्री राधा वृंदावन की सर्वोपरि ईश्वरी हैं, जो रस का ही सेवन करती हैं, एवं वे दीनों की सहज ही हितकारी हैं । श्री भारतेंदु हरिशचंद्र कहते हैं "कीरति सुकुमारी श्री राधा गुण की निधि एवं शोभा की निधि हैं ।" [2]

