सिंदूरी शिला, गोवर्धन

सिंदूरी शिला, गोवर्धन

सिंदूरी शिला वह शिला है जहाँ स्वयं श्री राधा ने शिला पर अपनी ऊँगली के घर्षण से सिंदूर प्रकट किया था एवं अपनी मांग में धारण किया था ।
एक समय श्री श्यामा जू श्रृंगार सहित श्री कृष्ण के पास आयीं, श्री कृष्ण ने श्री राधा से कहा कि आपकी मांग में सिंदूर नहीं है, आपका श्रृंगार पूर्ण नहीं है। इसपर श्री राधा ने कहा कि पुनः बरसाना जाकर सिंदूर धारण करने में तो बहुत विलम्ब हो जायेगा । इसपर श्री कृष्ण ने कहा कि आप यहाँ गोवर्धन की किसी भी शिला पर अपनी ऊँगली के घर्षण से सिंदूर प्राप्त कर सकती हैं । श्री राधा ने यहीं इस शिला पर अपनी उँगलियों से घर्षण किया और सिंदूर प्रकट हो गया जिसे उन्होंने फिर अपनी मांग में धारण किया ।

स्थान :
सिंदूरी शिला गोवर्धन के परिक्रमा मार्ग में मुखारविंद में स्थित है ।