सुमन वाटिकाविपिन में, ह्वैहौं कबहूं फूल - श्री ललित किशोरी, अभिलाष माधुरी, विनय (78)

सुमन वाटिकाविपिन में, ह्वैहौं कबहूं फूल - श्री ललित किशोरी, अभिलाष माधुरी, विनय (78)

सुमन वाटिकाविपिन में, ह्वैहौं कबहूं फूल।
कोमलकर दोउ भामते, धरिहैं वीनि दुकूल॥

- श्री ललित किशोरी, अभिलाष माधुरी, विनय (78)

वह दिन कब आएगा जब मैं वृंदावन की पुष्प-वाटिकाओं का ऐसा फूल बन जाऊँगा जिसे युगल सरकार (श्री राधा-कृष्ण) अपने कोमल हाथों से चुनकर अपने दुपट्टे के पल्लू में सँजो लेंगे।