श्रीराधे जू निबाहे बनेंगी - श्री लाल बलबीर जी, वृन्दावन शतक (58)

श्रीराधे जू निबाहे बनेंगी - श्री लाल बलबीर जी, वृन्दावन शतक (58)

श्रीराधे जू निबाहे बनेंगी ।
मो सम नहीं दीन या जग में दया दृष्टि सों तकाये बनेंगी ॥ [1]
औगुन भरी परी द्वारे पै सैनन माँहि बुलाये बनेंगी ।
दासी जानि चरन की स्वामिनि श्रीबनराज बसाये बनेंगी ॥ [2]

- श्री लाल बलबीर जी, वृन्दावन शतक (58)

श्री राधा अवश्य ही मुझे अपना मान लेंगी। इस पूरे संसार में मेरे समान दीन कोई नहीं है, अत: परम दयालु स्वामिनी मुझ पर कृपा की दृष्टि अवश्य डालेंगी । [1]

यद्यपि मैं औगुणों से भरा हुआ हूँ, फिर भी मैंने उनके द्वार पर शरण ली है, इसलिए, वे निश्चित रूप से मुझे कुछ संकेत देंगी और मुझे अपनी सेवा में बुलाएंगी । श्री लाल बलबीर कहते हैं, "श्री राधा मुझे अपने चरण कमलों की दासी जानकर मुझपर अवश्य कृपा की दृष्टि करेंगी और मुझे वृंदावन का वास प्रदान करेंगी" । [2]