एक से एक बड़े रसिकों के निवास जहाँ - श्री हरे कृष्णानन्द सरस्वती ‘हरे कृष्ण’, वृंदावन शतक (4)

एक से एक बड़े रसिकों के निवास जहाँ - श्री हरे कृष्णानन्द सरस्वती ‘हरे कृष्ण’, वृंदावन शतक (4)

एक से एक बड़े रसिकों के निवास जहाँ,
एक से एक बड़े रहते तत्त्व - ज्ञानी हैं। [1]
एक से हैं एक बढ़े उद्भट विद्वान जहाँ,
एक से एक बड़े जहाँ प्रेमाभिमानी हैं॥ [2]
एक से एक दिव्य विभूतियाँ विराजमान,
त्यागी अनुरागी जहाँ बड़े बड़े दानी हैं। [3]
ऐसी श्रीवृन्दाटवी के राजा नन्द-नन्दन हैं,
औ कीरति कुमारी श्री राधे महारानी हैं॥ [4]

- डंडी स्वामी श्री हरे कृष्णानन्द सरस्वती ‘हरे कृष्ण’, वृंदावन शतक (4)

जहां एक से बढ़कर एक रसिकों के निवास स्थान हैं, जहां एक से बढ़कर एक तत्वज्ञानी रहते हैं। [1]

जहां एक से बढ़कर बड़े उदार विद्वान हैं, जहां एक से बढ़कर एक प्रेम में उन्मत्त रहने वाले प्रेमी रहते हैं। [2]

जहां एक से बढ़कर एक दिव्य विभूतियाँ विराजमान हैं, जहां त्यागी, अनुरागी, एवं बड़े बड़े दानी रहते हैं। [3]

डंडी स्वामी श्री हरे कृष्णानन्द सरस्वती कहते हैं कि “ऐसे वृंदावन के राजा नंदनंदन हैं एवं महारानी कीर्तिकुमारी राधेरानी हैं।” [4]