(राग नाइकी)
होरी होरी कहि बोले सब ब्रज की नारि ।
नन्द गाँव बरसानो हिलि मिलि गावत इत उत रस की गारि ।। [1]
उड़त गुलाल अरुण भयो अम्बर चलत रंग पिचकारि कि धारि ।
रसिक बिहारी भानु-दुलारी नायक संग खेलें खेलवारि ।। [2]
- श्री बनी ठनी जी
सभी ब्रज की नारियाँ "हो हो होरी" कहकर उल्लास से होली खेल रही हैं । नंदगाँव और बरसाने में होली का खेल चल रहा है, और इधर-उधर प्रेम-रस भरी गालियाँ गाई जा रही हैं। [1]
गुलाल उड़ते-उड़ते आकाश लाल हो गया है, और पिचकारियों से रंग की धाराएँ बह रही हैं। श्री बनी ठानी कहती हैं—भानुदुलारी (श्रीराधा) और नायक (श्रीकृष्ण) दोनों मिलकर होली खेल रहे हैं। [2]
होरी होरी कहि बोले सब ब्रज की नारि ।
नन्द गाँव बरसानो हिलि मिलि गावत इत उत रस की गारि ।। [1]
उड़त गुलाल अरुण भयो अम्बर चलत रंग पिचकारि कि धारि ।
रसिक बिहारी भानु-दुलारी नायक संग खेलें खेलवारि ।। [2]
- श्री बनी ठनी जी
सभी ब्रज की नारियाँ "हो हो होरी" कहकर उल्लास से होली खेल रही हैं । नंदगाँव और बरसाने में होली का खेल चल रहा है, और इधर-उधर प्रेम-रस भरी गालियाँ गाई जा रही हैं। [1]
गुलाल उड़ते-उड़ते आकाश लाल हो गया है, और पिचकारियों से रंग की धाराएँ बह रही हैं। श्री बनी ठानी कहती हैं—भानुदुलारी (श्रीराधा) और नायक (श्रीकृष्ण) दोनों मिलकर होली खेल रहे हैं। [2]

