दीन बंधु यह नाम सुनि, मन में भयौ उत्साह ।
भक्तन के वत्सल सुनत, अति ही बाड़यौ दाह ॥
- श्री रतन अलि
भगवान का “दीनबंधु” नाम सुनकर मन उत्साह से भर गया, क्योंकि मैं दीन हूँ और प्रभु दीनों को अपनाने वाले हैं। परंतु भगवान का “भक्तवत्सल” नाम सुनते ही हृदय में अत्यंत ताप उत्पन्न हो गया, क्योंकि मैं भक्त तो हूँ नहीं; परंतु भक्ति पाने के लिए हृदय में भक्ति का दाह उठ खड़ा हुआ।
भक्तन के वत्सल सुनत, अति ही बाड़यौ दाह ॥
- श्री रतन अलि
भगवान का “दीनबंधु” नाम सुनकर मन उत्साह से भर गया, क्योंकि मैं दीन हूँ और प्रभु दीनों को अपनाने वाले हैं। परंतु भगवान का “भक्तवत्सल” नाम सुनते ही हृदय में अत्यंत ताप उत्पन्न हो गया, क्योंकि मैं भक्त तो हूँ नहीं; परंतु भक्ति पाने के लिए हृदय में भक्ति का दाह उठ खड़ा हुआ।

