कागा कोयल, हंस बग, गुबरीला मदपान ।
भगवत बरन समान दोऊ, क्रिया पृथक पहिचान ॥
- श्री भगवत रसिक, भगवत रसिक की वाणी, अनन्य निश्चयात्मक ग्रंथ [पूर्वार्ध] (21)
कौवा और कोयल, हंस और बगुला तथा गुबरीला और भ्रमर—इन युग्मों में दोनों का रंग एक-दूसरे के समान होता है; अर्थात् कौवे का कोयल से, हंस का बगुले से और गुबरीले का भ्रमर से रंग मिलता-जुलता होता है। किंतु इनकी पहचान कार्य की भिन्नता से होती है, न कि रंग से। इसी प्रकार साधु की पहचान उसके वेश-विन्यास या तिलक से नहीं, अपितु उसके आचरण, कार्य और भक्ति से होती है।
भगवत बरन समान दोऊ, क्रिया पृथक पहिचान ॥
- श्री भगवत रसिक, भगवत रसिक की वाणी, अनन्य निश्चयात्मक ग्रंथ [पूर्वार्ध] (21)
कौवा और कोयल, हंस और बगुला तथा गुबरीला और भ्रमर—इन युग्मों में दोनों का रंग एक-दूसरे के समान होता है; अर्थात् कौवे का कोयल से, हंस का बगुले से और गुबरीले का भ्रमर से रंग मिलता-जुलता होता है। किंतु इनकी पहचान कार्य की भिन्नता से होती है, न कि रंग से। इसी प्रकार साधु की पहचान उसके वेश-विन्यास या तिलक से नहीं, अपितु उसके आचरण, कार्य और भक्ति से होती है।

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