दास तो तिहारे जो उदास तो तिहारे - ब्रज के कवित्त

दास तो तिहारे जो उदास तो तिहारे - ब्रज के कवित्त

दास तो तिहारे जो उदास तो तिहारे,
दूर पास तो तिहारे आम खास तो तिहारे हैं। [1]
दीन तो तिहारे, मति हीन तो तिहारे,
जो नवीन तो तिहारे प्राचीन तो तिहारे हैं॥ [2]
कूर तो तिहारे गुण पूर तो तिहारे,
मशहूर तो तिहारे साँचे शूर तो तिहारे हैं। [3]
लायक तिहारे, यश गायक तिहारे,
हो सहायक हमारे पद-पायक तिहारे हैं॥ [4]

- ब्रज के कवित्त

हे बाँके बिहारी, यदि हम दास हैं तो तुम्हारे हैं, और उदास हैं तो भी तुम्हारे ही लिए हैं। चाहे हम दूर हैं या पास हैं परंतु हैं तो तुम्हारे ही, यदि हम आम हैं या ख़ास हैं, कुछ भी हैं, परंतु केवल तुम्हारे ही हैं। [1]

यदि दीन, मति हीन, नवीन या प्राचीन जैसे भी हैं तुम्हारे ही हैं। [2]

यदि हम दुष्ट हैं तो भी तुम्हारे ही तो जीव हैं, और यदि गुणी हैं तो भी तुम्हारे ही हैं। यदि मशहूर हैं तो भी तुम्हारे हैं एवं साँचे वीर हैं तो भी तुम्हारे हैं। [3]

यदि हम लायक़ हैं तो भी तुम्हारे ही हैं, यदि यश गायक हैं तो भी तुम्हारे ही यश गायक हैं। हे बाँके बिहारी, ऐसी कृपा हो कि तुम हमारे सहायक रहो क्यूँकि हम तुम्हारे चरणों के दास हैं। [4]