कामं तूलिकया करेण हरिणा यालक्तकैरकिंता
नानाकेलिविदग्धगोपरमणीवृन्दे तथा वन्दिता।
या संगुप्ततया तथोपनिषदां हृद्येव विद्योतते
सा राधाचरणद्वयी मम गतिर्लास्यैकलीलामयी।।
- श्री हित हरिवंश महाप्रभु, श्री राधा सुधा निधि (205)
श्री कृष्ण ने अपने हाथ से भली भांति जिन्हें महावर से अंकित किया, जो नाना केलियों में चतुर गोपांगनाओं के यूथ में वंदित हैं तथा जो वेद शिरोरूप उपनिषदों के ह्रदय में गुप्त रूप से ही प्रकाशित हैं वह एकमात्र लास्य (नृत्य) से पूर्ण श्री राधा के युगल चरण मेरी गति हैं।
नानाकेलिविदग्धगोपरमणीवृन्दे तथा वन्दिता।
या संगुप्ततया तथोपनिषदां हृद्येव विद्योतते
सा राधाचरणद्वयी मम गतिर्लास्यैकलीलामयी।।
- श्री हित हरिवंश महाप्रभु, श्री राधा सुधा निधि (205)
श्री कृष्ण ने अपने हाथ से भली भांति जिन्हें महावर से अंकित किया, जो नाना केलियों में चतुर गोपांगनाओं के यूथ में वंदित हैं तथा जो वेद शिरोरूप उपनिषदों के ह्रदय में गुप्त रूप से ही प्रकाशित हैं वह एकमात्र लास्य (नृत्य) से पूर्ण श्री राधा के युगल चरण मेरी गति हैं।

