(राग धनाश्री)
काले ही मोहन, काले ही सोहन
काली कलिन्दी के तट आयो । [1]
काली कलिन्दी में काली सी नागिन
काले से नाग को जाइ जगायो ।। [2]
काले को नाथ लियो छिन में
अरु काले के सीस पे नृत्य करायो । [3]
गोविन्द यों प्रभु सोभा बखानत
काले को नाथि कै नाथ कहायो ।। [4]
- श्री गोविन्द स्वामी, श्री गोविन्द स्वामी जी की वाणी
श्री श्याम सुंदर जो काले [श्याम] वर्ण के हैं , मन को सुहाने वाले मोहन, काली कालिन्दी (यमुना) के तट पर आए । [1]
काली कालिन्दी में एक काली सी नागिन ने अपने पति कालिया नाग को जाके जगाया । [2]
मोहन ने कालिया नाग को एक क्षण में नाथ कर उसके सिर पर नृत्य किया । [3]
श्री गोविन्द दास जी श्री कृष्ण की शोभा का वर्णन करते हुए कहते हैं कि मेरे प्रभु ने कालिया को नाथ कर ही अपना नाम नाथ कहलाया है । [4]
काले ही मोहन, काले ही सोहन
काली कलिन्दी के तट आयो । [1]
काली कलिन्दी में काली सी नागिन
काले से नाग को जाइ जगायो ।। [2]
काले को नाथ लियो छिन में
अरु काले के सीस पे नृत्य करायो । [3]
गोविन्द यों प्रभु सोभा बखानत
काले को नाथि कै नाथ कहायो ।। [4]
- श्री गोविन्द स्वामी, श्री गोविन्द स्वामी जी की वाणी
श्री श्याम सुंदर जो काले [श्याम] वर्ण के हैं , मन को सुहाने वाले मोहन, काली कालिन्दी (यमुना) के तट पर आए । [1]
काली कालिन्दी में एक काली सी नागिन ने अपने पति कालिया नाग को जाके जगाया । [2]
मोहन ने कालिया नाग को एक क्षण में नाथ कर उसके सिर पर नृत्य किया । [3]
श्री गोविन्द दास जी श्री कृष्ण की शोभा का वर्णन करते हुए कहते हैं कि मेरे प्रभु ने कालिया को नाथ कर ही अपना नाम नाथ कहलाया है । [4]

