प्रातर्भजामि शयनोत्थितयुग्मरूपं सर्वेश्वरं सुखकरं रसिकेशभूपम् ।
न्योन्यकेलिरसचिह्नसखीदृगौघं सख्यावृतं सुरतकाममनोहरञ्च ॥
- जगद्गुरु आद्यनिम्बार्काचार्य, प्रात: स्मरण स्तोत्र (3)
शयन से उठे हुए ऐसे श्रीराधा-माधव युगल स्वरूप का मैं प्रातःकाल भजन करता हूँ जिनकी पारस्परिक रस लीलाएँ एवं केलि विहार के चिह्न आदि सखियों के अवलोकन का विषय हैं, जो सर्वेश्वर, सुखप्रद, रसिक-भक्तों का परमाश्रय, सहचरीवृन्द से आवृत तथा सुरत काम की क्रीड़ाओं से मन का हरण कर रहे हैं ।
न्योन्यकेलिरसचिह्नसखीदृगौघं सख्यावृतं सुरतकाममनोहरञ्च ॥
- जगद्गुरु आद्यनिम्बार्काचार्य, प्रात: स्मरण स्तोत्र (3)
शयन से उठे हुए ऐसे श्रीराधा-माधव युगल स्वरूप का मैं प्रातःकाल भजन करता हूँ जिनकी पारस्परिक रस लीलाएँ एवं केलि विहार के चिह्न आदि सखियों के अवलोकन का विषय हैं, जो सर्वेश्वर, सुखप्रद, रसिक-भक्तों का परमाश्रय, सहचरीवृन्द से आवृत तथा सुरत काम की क्रीड़ाओं से मन का हरण कर रहे हैं ।

