श्रीराधा मेरे प्राणन हूँ ते प्यारी ।
भूलि हू मान न कीजै सुन्दरि हौं तौ शरण तिहारी ॥ [1]
नेक चितै हँसि बोलिये मोतें खोलिये घूँघट सारी ।
जय श्रीकृष्णदास हित प्रीति रीति बस भर लई अंकन बारी ॥ [2]
- श्री हित कृष्णदास जी
हे मेरी प्राणों से प्यारी श्री राधा! भूलकर भी आप मान न कीजिए; मैं आपकी शरण में हूँ । [1]
अपने घूँघट को खोलकर मेरी ओर भी तनिक सी कृपा दृष्टि डाल हँस-हँस कर बातें कीजिये । श्री हित कृष्णदास जी कहते हैं "हे प्यारी, प्रेम के वशीभूत हो मुझे अपने ह्रदय से लगाइये ।" [2]
भूलि हू मान न कीजै सुन्दरि हौं तौ शरण तिहारी ॥ [1]
नेक चितै हँसि बोलिये मोतें खोलिये घूँघट सारी ।
जय श्रीकृष्णदास हित प्रीति रीति बस भर लई अंकन बारी ॥ [2]
- श्री हित कृष्णदास जी
हे मेरी प्राणों से प्यारी श्री राधा! भूलकर भी आप मान न कीजिए; मैं आपकी शरण में हूँ । [1]
अपने घूँघट को खोलकर मेरी ओर भी तनिक सी कृपा दृष्टि डाल हँस-हँस कर बातें कीजिये । श्री हित कृष्णदास जी कहते हैं "हे प्यारी, प्रेम के वशीभूत हो मुझे अपने ह्रदय से लगाइये ।" [2]

