महारास देखवे पधारे शिव गोपिका ने - ब्रज के सेवैयाँ

महारास देखवे पधारे शिव गोपिका ने - ब्रज के सेवैयाँ

महारास देखवे पधारे शिव गोपिका ने,
रोक कहा दीक्षा ले प्रवेश द्वार कीजिये। [1]
बिना सखी भाव के प्रवेश अंतरंग नहीं,
बोले भण्डारी गुरुदीक्षा मोहे दीजिये॥ [2]
ललिता हरिदासी ने सुनाय महामंत्र कह्यो,
गुरुओं के गुरु आज चेला बन लीजिये। [3]
श्यामा-श्याम विमल विहार केलि वारिध में,
ब्रह्म रस त्याग मधुरत्व रस पीजिये॥ [4]
- ब्रज के कवित्त

महारास के दर्शन करने के लिए भगवान शिव वृंदावन में पधारे, लेकिन द्वार पर खड़ी ललिता सखी ने शिवजी से कहा कि पहले दीक्षा लीजिए तब महारास में प्रवेश कीजिए। [1]

ललिता सखी ने शिवजी से कहा "बिना सखी भाव के अंतरंग लीलाओं में प्रवेश संभव नहीं है", इस पर शिवजी ने कहा "कृपया मुझे गुरुदीक्षा दीजिए।" [2]

श्री ललिता सखी [श्री हरिदासी सखी] ने शिवजी को महामंत्र प्रदान कर कहा कि "हे शिवजी, आप गुरुओं के गुरु हैं लेकिन आज शिष्य बन लीजिए।" [3]

श्री ललिता सखी ने शिवजी से कहा "श्री श्यामाश्याम के विमल केलि-विहार रस सागर में ब्रह्म रस को त्याग कर अब मधुर रस का पान कीजिए।" [4]