श्री ठकुरानी घाट - गोकुल
पुष्टिमार्गीय वैष्णवों के लिए यह स्थली विशेष महत्त्वपूर्ण है । श्रीवल्लभाचार्यजी महाराज प्रथम बार जब ब्रज में पधारे तो वृहद्वन में ठहरे। अभी किसी लीलास्थली का अन्वेषण कर ही रहे थे कि श्रीयमुनाजी ने साक्षात् एक परम सुन्दरी युवती के रूप में दर्शन देकर कहा, “यह (वर्तमान) स्थली श्री ठकुरानी घाट है।" श्रीवल्लभाचार्य जी महाराज ने उसी स्थली का अनुभव कर विश्राम किया तथा श्रीमद्भागवत का पारायण किया ।
इसी घाट पर महाप्रभु श्री वल्लभाचार्य जी ने यमुनाष्टक की रचना की थी । यहाँ श्री वल्लभाचार्य महाप्रभु की बैठक है । यहाँ श्री यमुना एवं श्रीनाथजी का मंदिर है ।
श्री ठकुरानी घाट से रावल ग्राम तक श्री राधारानी की हद मानी जाती है ।
श्री ठकुरानी घाट के ठीक दाईं ओर श्री गोविन्द घाट स्थित है ।
श्री गोविन्द घाट - गोकुल
धर्म प्रचार तथा प्रसार हेतु निकले श्रीमन्महाप्रभु वल्लभाचार्यजी अपनी
प्रथम यात्रा में जिस समय झारखण्ड में थे तो सहसा प्रभु कृपा का अनुभव
कर ब्रज में चले आये । गोकुल में यमुना के सुरमणीय तट पर वहाँ के लोगों
से जिज्ञासा करने लगे । अपने पूर्वजों से सुनी हुई स्थली की ओर संकेत कर
वहाँ के बड़े-बूढ़ों ने कहा अमुक स्थान नन्दबाबा की खिरक के नाम से विख्यात है तथा जहाँ आप विराजे हैं, साथ ही दांई ओर की स्थली गोविन्द घाट के नाम से विख्यात है। आचार्य प्रभु वहीं विराजमान हो गये और शमी वृक्ष के नीचे श्रीमद्भागवत सप्ताह पारायण किया ।
वहाँ प्रभु को विराजमान कर महाप्रभु श्री वल्लभाचार्य जी सेवा-प्रार्थना करने लगे। मध्य रात्रि में भगवान प्रकट हो गये। पीताम्बर धारण किये हैं, कर्णों में जगमगाते कुण्डल धारण कर रखे हैं, हाथ में वंशी, उर वैजयन्ती माला, सघन घुँघराली केशावलि, मयूर पिच्छधारी श्यामलोज्ज्वल छवि का प्रसार करते हुए, प्रकट होकर भगवान ने अपने स्नेह सिञ्चित पीताम्बर छोर से महाप्रभुजी को नव जीवन ही प्रदान कर दिया । जगद्उद्धार हेतु ब्रह्म-सम्बन्ध प्रदान करने की आज्ञा करी । करुणावरुणालय श्रीकृष्ण ने यह भी आश्वासन दिया कि “आप जगत उद्धार हेतु जिस किसी जीव को मेरे सम्मख करेंगे मैं उसे अङ्गीकार करूंगा।" इसके पश्चात् श्री कृष्ण अन्तर्धान हो गये।
यहीं पर श्री वल्लभचार्य जी ने विश्व प्रसिद्ध श्री मधुराष्टकम् की रचना की । सर्वप्रथम इसी स्थली पर, महाप्रभु वल्लभाचार्यजी ने 'श्रीदामोदर दास हरसानी' को दीक्षा दी ।
गोविन्द घाट से गोकुल ग्राम तक श्री कृष्ण की हद मानी जाती है ।
गोविन्द घाट के ठीक बाईं ओर श्री ठकुरानी घाट स्थित है । यहाँ श्री यमुना जी एवं श्रीनाथजी का मंदिर है ।
स्थान :
श्री ठकुरानी घाट एवं श्री गोविन्द घाट गोकुल, मथुरा में स्थित है ।

