जो कोउ साँची प्रीति सौं, 'हरि-हरि' कहत लड़ाइ ।
तिनकौं 'ध्रुव' कहा दैहिंगे, यह जानी नहिं जाइ ॥
- श्री हित ध्रुवदास, बयालीस लीला, जीव दशा (18)
यदि कोई व्यक्ति सच्चे प्रेम और लाड़-चाव से श्री हरि का नाम लेता है, तो उस प्रेमी को वे क्या-क्या दे सकते हैं—इसका अनुमान लगाना भी कठिन है।
तिनकौं 'ध्रुव' कहा दैहिंगे, यह जानी नहिं जाइ ॥
- श्री हित ध्रुवदास, बयालीस लीला, जीव दशा (18)
यदि कोई व्यक्ति सच्चे प्रेम और लाड़-चाव से श्री हरि का नाम लेता है, तो उस प्रेमी को वे क्या-क्या दे सकते हैं—इसका अनुमान लगाना भी कठिन है।

