श्री स्वामी जू के सरन नित, रूपसखी विश्राम - श्री रूप सखी, सिद्धांत के दोहा (8)

श्री स्वामी जू के सरन नित, रूपसखी विश्राम - श्री रूप सखी, सिद्धांत के दोहा (8)

श्री स्वामी जू के सरन नित, रूपसखी विश्राम । 
जुगल-केलि निरखौं सदा, श्री वृंदावन धाम ॥
- श्री रूप सखी, सिद्धांत के दोहा (8)

मैं सदा ललिता-अवतार श्री स्वामी हरिदास जू की शरण में रहकर श्री वृन्दावन धाम में श्री श्यामा-श्याम की दिव्य जुगल-केलि का निरंतर दर्शन करता रहूँ—यही मेरी अभिलाषा है।