कबहुँ लाड़िली होत पिय, लाल प्रिया ह्वै जात।
नहिं जानत या प्रेम रस, निशि दिन कहां बिहात॥
- ब्रज के दोहे
प्रेम की अद्भुत अवस्था में कभी श्री राधा ही श्री कृष्ण के रूप में प्रतीत होती हैं और कभी श्री कृष्ण श्री राधा के रूप में। इस अद्भुत प्रेम-रस में दिन और रात कब बीत जाते हैं, इसका उन्हें तनिक भी ज्ञान नहीं रहता।
नहिं जानत या प्रेम रस, निशि दिन कहां बिहात॥
- ब्रज के दोहे
प्रेम की अद्भुत अवस्था में कभी श्री राधा ही श्री कृष्ण के रूप में प्रतीत होती हैं और कभी श्री कृष्ण श्री राधा के रूप में। इस अद्भुत प्रेम-रस में दिन और रात कब बीत जाते हैं, इसका उन्हें तनिक भी ज्ञान नहीं रहता।

