नैंन सिरानैंरी प्यारी देखत मुख - श्री हरिराम व्यास (विशाखा अवतार) - व्यास वाणी, उत्तरार्ध (122)

नैंन सिरानैंरी प्यारी देखत मुख - श्री हरिराम व्यास (विशाखा अवतार) - व्यास वाणी, उत्तरार्ध (122)

(राग कान्हरौ)
नैंन सिरानैंरी प्यारी देखत मुख ।
सुनि राधा बाधा न रही अब, तैं कीनौं मो पर रुख ॥ [1]
श्रवण सीतल भये बचननि सुनि, गये दारुन दुख ।
व्यासकीस्वामिनी सौ मिलि विहरत, नख-सिख भयौरी परम सुख ॥ [2]

- श्री हरिराम व्यास (विशाखा अवतार) - व्यास वाणी, उत्तरार्ध (122)

हे प्यारी जू, आपके मुख कमल का दर्शन कर मेरे नेत्र अश्रुपूरित हो गए । हे श्री राधा, मेरी बात सुनिए, मुझपर आपकी करुणा दृष्टि होने से अब मेरी समस्त बाधाएं नष्ट हो गयी है । [1]

आपके श्री मुख से मधुर वचन का पान कर मेरे श्रवण शीतल हो गए हैं, सब दुःख दूर हो गए । श्री हरिराम व्यास कहते हैं "हे स्वामिनी जू, आपके संग विचरण करने से मुझे परम सुख प्राप्त हो गया है ।" [2]