श्री राधा टीला - वृन्दावन

श्री राधा टीला - वृन्दावन

श्री राधा टीला हरिदासी सम्प्रदाय के रसिक भक्त श्री बांके बिहारीदास जी की भजन स्थली है । 
आज से 250 वर्ष पूर्व श्री बांके बिहारीदास जी वृन्दावन वास करते हुए यहीं एक टीले पर भजन करते थे । यह स्थान सघन वृक्षों एवं लताओं से घिरा हुआ था, भूमि पर बालुका बिछी थी और श्री यमुना जी समीप से ही प्रवाहमान थी । इस स्थान की शोभा बड़ी ही सुन्दर थी । श्री बांके बिहारीदास जी अपने इष्ट युगल किशोर श्री राधाकृष्ण की सेवा करते थे । एक दिन वे श्री राधा कृष्ण को भोग लगाना भूल गए, उन्हें निद्रा आ गयी और वे सो गए । वातावरण पूर्णतः शांत था, दूर-दूर तक वहाँ कोई न था । उसी रात्रि वहां एक 10 वर्ष की लाली आयी । लाली श्री बांके बिहारीदास जी के पास आयी और कहा कि बाबा, मोय भूक लगी है। इस मधुर वाणी को सुनकर श्री बांके बिहारीदास जी निद्रा से जाग गए और 10 वर्षीय लाली को देख आश्चर्यचकित थे की इस निर्जन स्थान में मध्य रात्रि में यह छोटी सी लाली कैसे और कहाँ से आयी । श्री बांके बिहारीदास जी ने लाली को अपनी मधुकरी खिलाई और यमुना जल पिलाया । वह लाली वहां से चली गयी। श्री बांके बिहारीदास जी को पुनः निद्रा आ गयी । निद्रा में उन्हें स्वप्न आया और उन्होंने देखा की श्री राधारानी मेरे सम्मुख प्रकट हैं । श्री राधारानी ने कहा बाबा, देखो मैंने तुम्हारा नियम भंग नहीं होने दिया । तुम नित्य ही मुझे भोग लगाते हो और तब प्रसाद पाते हो । लेकिन आज तुम भोग लगाना भूल गए लेकिन तुम्हारी राधा स्वयं ही तुम्हारे पास भोग लेने आ गयी और तुम्हारा नियम टूटने नहीं दिया । तुम्हारे हाथ से मधुकरी खायी और यमुना जल पान किया । इसके बाद श्री राधारानी अंतर्ध्यान हो गयीं । श्री बांके बिहारीदास जी निद्रा से जाग गए और श्री राधारानी की ऐसी विलक्षण कृपा से आनंद में डूबने लगे । उन्हें यह अनुभव हुआ की इस स्थान पर श्री राधारानी का वास है । अब श्री बांके बिहारीदास जी दृढ़ता से यहाँ भजन करने लगे । युगल उपासना करते-करते यहीं श्री श्री बांके बिहारीदास जी नित्य लीला में प्रविष्ट हो गए । इस स्थान पर स्वयं श्री राधारानी का आगमन हुआ था इसी कारण इस स्थान का नाम राधा टीला हुआ । आज भी इस टीले पर अनेक पक्षी, मोर, एवं तोते इत्यादि दाना खाने आते हैं।
 
स्थान :
श्री राधा टीला रमणरेती, वृन्दावन में परिक्रमा मार्ग पर धर्मसंघ के समीप में स्थित है ।