श्री राधा सी स्वामिनि जाकै ।
कमी कौन बात की ताकैं ॥
श्री वृन्दावन की ठकुराइनि ।
लग्यौ रहत मोहन नित पाइनि ॥ [1]
वंशी में जाको जस गावै ।
निरषि-निरषि नैनन सचु पावै ॥
श्री ललिता सी जाकै अग्रेसर ।
परिकर कों सब विधि पोखन कर ॥ [2]
रमा, रुकमिनी, गोपिनि अंसी ।
सो अपनाई दई अलि वंशी ॥
अली किशोरी की यह आसा ।
देहु स्वामिनी विपिन निवासा ॥ [3]
- श्री किशोरी अलि जी, विनय के पद (54)
जिसकी [जिस जीव की] श्री राधा सी स्वामिनी हैं उसे किस बात की कमी है ? वह ऐसी स्वामिनी हैं जो श्री वृंदावन धाम की ठकुरानी हैं एवं अखिल ब्रह्मांडों के स्वामी श्याम सुंदर भी नित्य ही जिनके चरणों से लगे रहते हैं । [1]
जिनका यशोगान श्री श्याम सुंदर वंशी में करते हैं एवं जिन्हें अपने नैनों से निरख निरख कर परम सुख पाते हैं । श्री ललिता जी जैसी जिन [श्री राधा] की प्रधान सखी हैं एवं जो [श्री राधा] अपने परिकर जन का सब भाँति पोषण करती हैं । [2]
जिन श्री राधा की रमा, रुक्मणी, गोपिनि आदि अंश हैं उन श्री राधा ने अपना कर अपनी निज सखी [वंशी अलि] का संग हमें प्रदान किया । श्री अलि किशोरी जी कहते हैं कि हमारी समस्त आशाएँ स्वामिनी जी ने श्री वृंदावन का वास देकर पूर्ण कर दी । [3]
कमी कौन बात की ताकैं ॥
श्री वृन्दावन की ठकुराइनि ।
लग्यौ रहत मोहन नित पाइनि ॥ [1]
वंशी में जाको जस गावै ।
निरषि-निरषि नैनन सचु पावै ॥
श्री ललिता सी जाकै अग्रेसर ।
परिकर कों सब विधि पोखन कर ॥ [2]
रमा, रुकमिनी, गोपिनि अंसी ।
सो अपनाई दई अलि वंशी ॥
अली किशोरी की यह आसा ।
देहु स्वामिनी विपिन निवासा ॥ [3]
- श्री किशोरी अलि जी, विनय के पद (54)
जिसकी [जिस जीव की] श्री राधा सी स्वामिनी हैं उसे किस बात की कमी है ? वह ऐसी स्वामिनी हैं जो श्री वृंदावन धाम की ठकुरानी हैं एवं अखिल ब्रह्मांडों के स्वामी श्याम सुंदर भी नित्य ही जिनके चरणों से लगे रहते हैं । [1]
जिनका यशोगान श्री श्याम सुंदर वंशी में करते हैं एवं जिन्हें अपने नैनों से निरख निरख कर परम सुख पाते हैं । श्री ललिता जी जैसी जिन [श्री राधा] की प्रधान सखी हैं एवं जो [श्री राधा] अपने परिकर जन का सब भाँति पोषण करती हैं । [2]
जिन श्री राधा की रमा, रुक्मणी, गोपिनि आदि अंश हैं उन श्री राधा ने अपना कर अपनी निज सखी [वंशी अलि] का संग हमें प्रदान किया । श्री अलि किशोरी जी कहते हैं कि हमारी समस्त आशाएँ स्वामिनी जी ने श्री वृंदावन का वास देकर पूर्ण कर दी । [3]

