कथितं ते प्रियतमे गुह्याद्गुह्योत्तमोत्तमम्
रहस्यानां रहस्यं यद्दुर्लभानां च दुर्लभम् ।।
- पद्मपुराण, खण्डः 5 (पातालखण्डः), अध्याय 69, छंद (57)
हे प्रियतम, मैंने तुमको गोपनीय से भी गोपनीय, रहस्यों का भी रहस्य, दुर्लभों से भी दुर्लभ सर्वोच्च श्री वृंदावन धाम के बारे में ही बताया है।
रहस्यानां रहस्यं यद्दुर्लभानां च दुर्लभम् ।।
- पद्मपुराण, खण्डः 5 (पातालखण्डः), अध्याय 69, छंद (57)
हे प्रियतम, मैंने तुमको गोपनीय से भी गोपनीय, रहस्यों का भी रहस्य, दुर्लभों से भी दुर्लभ सर्वोच्च श्री वृंदावन धाम के बारे में ही बताया है।

