श्रीबिहारीदास संतोष गहि, बैठयौ सिखर सुमेरु - श्री बिहारिन देव जी की वाणी, सिद्धान्त की साखी (216)

श्रीबिहारीदास संतोष गहि, बैठयौ सिखर सुमेरु - श्री बिहारिन देव जी की वाणी, सिद्धान्त की साखी (216)

श्रीबिहारीदास संतोष गहि, बैठयौ सिखर सुमेरु ।
सूझे श्रीहरिदास तें, ऊँचे नीचे ढ़ेर ॥

- श्री बिहारिन देव - बिहारिन देव जी की वाणी, सिद्धान्त की साखी (216)

मैंने समस्त परमार्थ-संबंधी साधनाओं एवं संबंधों से अपने मन में भली भाँति संतोष करके ही श्री स्वामीजी (ललिता अवतार श्री हरिदास) महाराज की सुमेरु-शिखर की सर्वोच्च रस-रीति नित्य-विहार-उपासना को प्राप्त किया है। इससे अब मुझे समस्त परमार्थों एवं उपासनाओं के स्वरूप अर्थात् कौन कितना ऊँचा-नीचा है, यह सहज स्वभाव से, स्वामीजी की कृपा से दिखने लगा है।