व्यास बड़े हरिके जना - श्री हरिराम व्यास, व्यास वाणी, सिद्धांत की साखी (58)

व्यास बड़े हरिके जना - श्री हरिराम व्यास, व्यास वाणी, सिद्धांत की साखी (58)

व्यास बड़े हरिके जना, जिनकौ हरि सौ मित्त ।
निसिदिन ते माते रहैं , सदा प्रफुल्लित चित्त ॥

- श्री हरिराम व्यास, व्यास वाणी, सिद्धांत की साखी (58)

श्री हरिराम व्यास जी कहते हैं कि संसार में वे ही भक्त सबसे महान और श्रेष्ठ हैं, जिनका साक्षात् श्री हरि के साथ संबंध (मित्रता) है। ऐसे महापुरुष अपने प्रियतम के प्रेम के मद में रात-दिन छके रहते हैं और उनका चित्त सदैव आनंद से प्रफुल्लित रहता है।