श्रीवृन्दावन धाय धाय, कालिन्दी पै जाय जाय,
राधा-राधा गाय-गाय, करेंगे गुजारा हम। [1]
माँग टूक खाय-खाय, जमुना जल पाय-पाय,
लता वेलि सुखद छाय काहू सों ना करें गम॥ [2]
घाटल कुञ्ज सोय-सोय, निर्जन वन रोय-रोय,
हृदय कूटि धोय-धोय, निकसेंगे कब दम। [3]
प्रिया छवि देख-देख, काजर की रेख देख,
विधना के लिखे लेख, रद्द करें खाते यम॥ [4]
- श्री हित गोपाल दास [सेवा कुञ्ज वाले], निकुंज रस वल्लरी (58)
श्री वृंदावन की ओर दौड़ते हुए, कालिन्दी के तट पर जाकर, "राधा राधा" का गान करते हुए हम अपने जीवन का पालन करेंगे। [1]
राधा-राधा गाय-गाय, करेंगे गुजारा हम। [1]
माँग टूक खाय-खाय, जमुना जल पाय-पाय,
लता वेलि सुखद छाय काहू सों ना करें गम॥ [2]
घाटल कुञ्ज सोय-सोय, निर्जन वन रोय-रोय,
हृदय कूटि धोय-धोय, निकसेंगे कब दम। [3]
प्रिया छवि देख-देख, काजर की रेख देख,
विधना के लिखे लेख, रद्द करें खाते यम॥ [4]
- श्री हित गोपाल दास [सेवा कुञ्ज वाले], निकुंज रस वल्लरी (58)
श्री वृंदावन की ओर दौड़ते हुए, कालिन्दी के तट पर जाकर, "राधा राधा" का गान करते हुए हम अपने जीवन का पालन करेंगे। [1]
ब्रजवासियों से जो भी थोड़ी सी मधुकरी मिल जाएगी, उसे पाकर जीवन यापन करेंगे । यमुना के पवित्र जल से तृप्त होंगे और श्री वृंदावन की लताओं की छांव में भजन करते हुए, मन में किसी भी प्रकार का शोक नहीं रखेंगे [उन्मत्त होकर भजन करेंगे]। [2]
ब्रज के घाटों या किसी कुंज में विश्राम करते हुए, श्री राधा कृष्ण का ध्यान करते हुए, आंसू बहाते हुए, हृदय की कुटिलता रूपी मल को धोते हुए, कब हमारे प्राण निकलेंगे? [3]
श्री राधा की दिव्य छवि देखकर, उनकी काजल की रेखा को निहारते हुए, समस्त विधाता के लिखे लेखों और यमराज के हिसाब-किताब को समाप्त करते हुए, हम श्री राधा रानी की नित्य सेवा की प्राप्ति करेंगे। [4]

