धन विद्या गुण और बल, यह न बड़प्पन देत - श्री नारायण स्वामी, अनुराग रस (37)

धन विद्या गुण और बल, यह न बड़प्पन देत - श्री नारायण स्वामी, अनुराग रस (37)

धन विद्या गुण और बल, यह न बड़प्पन देत ।
नारायण सोई बड़ो, जाको हरिसों हेत ॥

- श्री नारायण स्वामी, अनुराग रस (37)

धन-संपत्ति, उच्च शिक्षा, नाना प्रकार के गुण और शारीरिक या मानसिक बल—ये वस्तुएँ मनुष्य को वास्तविक बड़प्पन (श्रेष्ठता) प्रदान नहीं करतीं। वास्तव में वही व्यक्ति बड़ा और महान है, जिसका श्री हरि (भगवान) के चरणों में सच्चा प्रेम और अनुराग है।