अरब खरब पाऊँ जनम - ब्रज के दोहे

अरब खरब पाऊँ जनम - ब्रज के दोहे

अरब खरब पाऊँ जनम, चिन्ता मोय न मीत।
दिन दूनी निशि चौगुनी, जो बाढ़े पद प्रीति॥
- ब्रज के दोहे

हे मित्र! यदि मुझे अरबों-खरबों जन्म भी लेने पड़ें, तो मुझे उसकी कोई चिंता नहीं है। मेरी केवल एक ही अभिलाषा है कि प्रत्येक जन्म में श्री राधा महारानीजू के श्री चरणों के प्रति मेरा प्रेम दिन दूना और रात चौगुना बढ़ता ही रहे।