(राग सारंग)
सोभित आज छबीली जोरी।
सुंदर नवल रसिक मन मोहन, अलबेली नव वैस किसोरी ।। [1]
बेसरि उभय हँसनि में डोलत, सो छवि लेत प्रान चित चोरी।
'हित ध्रुव' फँदी मीन ये अखियाँ, निरखत रूप प्रेम की डोरी ।। [2]
- श्री हित ध्रुवदास, बयालीस लीला, पद्यावली (30)
आज श्री लाड़ली लाल की छवि पूरित जोड़ी अनुपम शोभा दे रही है। सुन्दर एवं नित्य नव-नवायमान् रूप लावण्य-धाम रसिक मन-मोहन श्रीलाल जी और रूप विलक्षण नित्य नूतन कुँवरि किशोरी की जोड़ी अपूर्व है । [1]
हँसते समय दोनों के नासा मौत्तिक की विलक्षण थिरकन छवि हमारे चित्त एवं प्राणों का अपहरण कर रही है। श्री हित ध्रुवदास जी कहते हैं कि प्रेम रूपी बनसी की डोर [मछली फँसाने के काँटे] में फँसी हुई हमारी ये मीन रूपी आँखें युगल के रूप का दर्शन करती रहती हैं। [2]
सोभित आज छबीली जोरी।
सुंदर नवल रसिक मन मोहन, अलबेली नव वैस किसोरी ।। [1]
बेसरि उभय हँसनि में डोलत, सो छवि लेत प्रान चित चोरी।
'हित ध्रुव' फँदी मीन ये अखियाँ, निरखत रूप प्रेम की डोरी ।। [2]
- श्री हित ध्रुवदास, बयालीस लीला, पद्यावली (30)
आज श्री लाड़ली लाल की छवि पूरित जोड़ी अनुपम शोभा दे रही है। सुन्दर एवं नित्य नव-नवायमान् रूप लावण्य-धाम रसिक मन-मोहन श्रीलाल जी और रूप विलक्षण नित्य नूतन कुँवरि किशोरी की जोड़ी अपूर्व है । [1]
हँसते समय दोनों के नासा मौत्तिक की विलक्षण थिरकन छवि हमारे चित्त एवं प्राणों का अपहरण कर रही है। श्री हित ध्रुवदास जी कहते हैं कि प्रेम रूपी बनसी की डोर [मछली फँसाने के काँटे] में फँसी हुई हमारी ये मीन रूपी आँखें युगल के रूप का दर्शन करती रहती हैं। [2]

