करत इन्हीं कौ ध्यान ईस सनकादिक से,
रटौं जस संत केते झाँझ लै करन है। [1]
हिये हरषाते सिरनाते आय धाय धाय,
कहत इही जी कल कंटक हरन हैं॥ [2]
लाड़िले रसिक छैल लाड़िली दयानिधि ये,
लाल नंदलाल हिये धीरज धरन हैं। [3]
दास चित्त आलै हैं करत हैं निहालैं हालै,
सदाँ ही दयालै राधे तेरे चरन हैं॥ [4]
- श्री लाल बलबीर, ब्रज बिनोद, चरण वर्णन (2)
सनकादि जैसे ईश्वर-कोटि के भक्त भी जिन श्री चरणों का ध्यान करते हैं, और जिनका यशोगान संतगण नित्य ही झांझ लेकर करते हैं। [1]
रटौं जस संत केते झाँझ लै करन है। [1]
हिये हरषाते सिरनाते आय धाय धाय,
कहत इही जी कल कंटक हरन हैं॥ [2]
लाड़िले रसिक छैल लाड़िली दयानिधि ये,
लाल नंदलाल हिये धीरज धरन हैं। [3]
दास चित्त आलै हैं करत हैं निहालैं हालै,
सदाँ ही दयालै राधे तेरे चरन हैं॥ [4]
- श्री लाल बलबीर, ब्रज बिनोद, चरण वर्णन (2)
सनकादि जैसे ईश्वर-कोटि के भक्त भी जिन श्री चरणों का ध्यान करते हैं, और जिनका यशोगान संतगण नित्य ही झांझ लेकर करते हैं। [1]
वे श्री चरण, जिनकी शरण ग्रहण करने से हृदय अति हर्षित और रोमांचित हो उठता है, और जो कलियुग के समस्त दोषों का हरण करने वाले हैं। [2]
वही करुणा की मूर्ति, लाड़िली किशोरी जी के श्री चरण, लाड़ले रसिक छैल नंदलाल श्रीकृष्ण के हृदय को धीरज प्रदान करते हैं। [3]
वही करुणा की मूर्ति, लाड़िली किशोरी जी के श्री चरण, लाड़ले रसिक छैल नंदलाल श्रीकृष्ण के हृदय को धीरज प्रदान करते हैं। [3]
श्री लाल बलबीर कहते हैं कि "ऐसे श्री राधा के चरण, जो सदा कृपा और दया बरसाने वाले हैं, जो हृदय को आनंदित कर देने वाले हैं—उन श्री चरणों को यह दास अपने चित्त में सदा बसाए रखता है।" [4]

